Saturday, March 21, 2009

चार्वाक सत्य जगत मिथ्या !

मानव जीवन का असली आनंद पाने का रहस्य जानने के लिए अधिकाँश लोग अध्यात्म की मुड़ जाते हैं कुछ अधिक जिज्ञासा वाले हिमालय की और प्रस्थान कर जाते हैं। परन्तु कुछ लोग इतने भाग्यशाली होते हैं जिन्हें इस रहस्य की चाबी घर बैठे ही मिल जाती है। सूद साहब ऐसे अति दुर्लभ भाग्यशाली लोगों में से एक हैं। इस में भी घोर आश्चर्य की बात यह है कि ब्रह्म-ज्ञान धारा का यह रस केवल सूद साहब ही नहीं अपितु उन के सारे परिवार ने चख रखा है। जिस संसार के गहन दु:खों को देख सिद्धार्थ बुद्ध हो गए कम्बखत वो दुःख सूद साहब का आज तक एक बाल भी न टेढा कर पाए। सांसारिक कष्टों से यह विरक्ति उन ने किस अघोरी की सेवा कर पायी है यह रहस्य हमारे लिए अनबूझा है।


दुनिया इधर से उधर हो जाए या यह कहना उचित होगा कि उन की दुनिया इधर से उधर करने का कोई लाख प्रयास कर ले परन्तु सूद साहब कभी टस से मस नहीं हुए। वो आज भी हमेशा की तरह हर सुबह अपने घर के बाहर सड़क पर किसी गाड़ी से टेक लगा बड़ी तन्मयता से अपनी छाती के सफ़ेद बाल उखाड़ते और कश लगाते आती जाती काम वाली बाईओं को घूरते। मान-अपमान, अपेक्षा-उपेक्षा और उचित-अनुचित के गणित से वो बहुत ऊपर उठ चुके हैं। अपने मन से कोई बात तुंरत धो देने की योगिक शक्ति उन ने सिद्ध कर रखी है। हमारे जैसे तुच्छ लोगों की तरह नहीं कि किसी ने 'ओये' कह दिया तो दस दिन तक मुंह लटकाए बैठे हैं। सूद साहब के घर हजारों बार लोग-बाग़ आकर सूद साहब को उन की माताजी या बहनजी का स्मरण करा चले जाते परन्तु सूद साहब किसी का बूरा न मानते। मानते होते तो उन की पुनरावृत्ति न होने देते पर यहाँ तो यह क्रम अनवरत जारी रहता है। सूद साहब की नजर में ये वो सांसारिक भोगों से लिप्त लोग हैं जो उस माया को भुला नहीं पाते जो माया उन्होंने गलती से कभी सूद साहब को सोंप दी थी। वो अज्ञानी लोग यह नहीं समझ पाते थे कि सूद साहब वो माया अपने मन मस्तिस्क से कभी की धो चुकें हैं। इन अज्ञानी लोगों की लिस्ट में राशन वाला बनिया, धोबी, दूध वाला, गाड़ी धोने वाला, गाड़ी मरम्मत वाला, कई व्यापारी, कई सरकारी कर्मचारी, काम वाली बाई आदि आदि हर जाति धर्म तथा समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं। सूद साहब किसी के साथ भेद-भावः नहीं करते तथा हर किसी का समान भावः से पैसा मारते।


अगर कोई यह समझे कि शायद मैं सूद साहब से खार खाता हूँ और उन की विवशता का उपहास का रहा हूँ तो मैं यह बताना उचित समझता हूँ कि सूद साहब के घर में किसी चीज कि कमी नहीं हैं। दो गाडियां, दो कमाऊ बेटे, लाखों का अपना फ्लैट, लैपटॉप, लान, बड़ा टीवी, छोटे मोबाइल, डिजायनर कपड़े और यहाँ तक की डिजायनर कुत्ता भी है। महर्षि चार्वाक के महान सिद्धांत, "यावेत जीवेत सुखं जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत' का ऐसा कठिन पालन मैंने आज तक न देखा न सुना। सूद साहब का व्यापार आज तक किसी को समझ नहीं आया, उन का आफिस तो है परन्तु किस चीज का, यह उन के आफिस के पड़ोसी भी नहीं जानते। उन को जानने वाले लोग उन का जिक्र आते ही स्वत: अपने को मुस्कराता पाते। जितना मैं समझ पाया सूद साहब की असली प्रेरणा उन की अपनी पत्नी थी जो समाज के सारे विरोध, तानों और गाली-गलोच को मन से धो देने में सूद साहब की बहुत सहायता करती। इस के अतिरिक्त जो प्रेरणा सूद साहब की पत्नी न दे पाती उस के लिए सूद साहब ने अलग से व्यवस्था कर रखी थी।


आज तक कभी सूद साहब के घर से सोसाएटी का मासिक शुल्क कभी नहीं आया था। उन ने नाम के नोटिस सोसायटी के सुचना पट्ट पर सालों से नियमित रूप से चिपके रहते । परन्तु यह तो सौ-दो सौ की छोटी सी बात थी, हैरानी तो तब हुए जब हमारी सोसायटी के प्रबुद्ध सदस्यों ने जो सदैव भारतीय राजनीती में भ्रष्टाचार से खिन्न रहते, प्रशासन में साफ सुथरी छवि वाले लोगों की मांग करते थे , मिसेज सूद को सोसायटी के वाइस प्रसीडेंट पद की नियुक्ति दे दी। नियमित रूप से मासिक शुल्क वालों के लिए इस से बड़ा तमाचा क्या हो सकता था? अब मिसेज सूद दनदनाती चलती और व्यवस्था ठीक करने का भाषण देती। एक बार एक बड़ी मजेदार बात हुयी। मैं अपने एक व्यापारिक पार्टी के पास उस के आफिस बैठा था जब उस ने मुझे एक पत्रिका देखने की लिए दी। उस वर्ष शहर में हुए व्यापारिक मेले में उन के स्टाल के चित्र उस पत्रिका में थे। पत्रिका देखते देखते मैंने एक चित्र में उन के स्टाल पर सूद साहब को खड़े पाया। मैंने अपनी स्वत: वाली मुस्कान दबाते उस व्यक्ति से पुछा कि यह आदमी केवल दर्शक है या कुछ और। मेरा इतना कहना था कि उन साहब ने चाय का पुन: आदेश दिया तथा मुझे आधा घंटा और बैठना पड़ा।


दूसरों पर मुस्कराते और सूद साहब के पड़ोसी हुए मुझे दस- बारह साल हो गए। इन दस सालों में मैंने कैसे अपनी माया उन से बचा रखी थी मैं जानता हूँ। जाने कैसे कैसे बहाने बना मैं उन का मुझ से कोई आर्थिक व्यवहार करने का कोई भी तरीका नहीं चलने दे रहा था। परन्तु बकरे की अम्मा कब तक खैर मानती । मेरा अपना पैसा बचाने का प्रयास उन के मेरा पैसा मारने के प्रण से कमजोर निकला। दो महीने पहले वो मेरे घर पालथी मार मुझे कुछ व्यापारिक विक्रय करने के लिए मना ले गए। मैं इस अहसास के साथ की शायद मेरे से लिहाज कर वो कुछ शर्म रखेंगे मैंने उन्हें उन की इच्छानुसार सामान दे दिया और वो मेरे हाथ दो दिन की तारीख का चैक पकड़ा गए। आज दो महीने बाद भी जब मेरा कोई कर्मचारी वो चैक ले बैंक जाता है तो बैंक का टैलर उसे देख स्वत: मुस्कुरा देता है।


अभी अभी ताजा ख़बर आयी कि कल शाम दो तीन दूध वाले मिल कर सूद साहब के घर से कुछ बर्तन उठा ले गए। अपने महीनो के पैसे न मिलने के कारण। परन्तु सूद साहब आज सुबह भी अपने सफ़ेद बाल उखाड़ते वहीँ खड़े थे और मिसेज सूद जमादार को सफाई ठीक से न करने पर सोसाईटी से निकलने की धमकी दे रही थी।


"चार्वाक सत्य जगत मिथ्या " !!


9 comments:

ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey said...

वाह, सूद साहब मूल सुरक्षित रखे हैं और सूद पर जिन्दा हैं!

praney ! said...

Wah Pandey ji, aap ne bhi khoob kahi :) !

मा पलायनम ! said...

सत्य बचन जी .

RAJ SINH said...

bahut hee badhiya !

sirf ek yaad dila doon . ve 'charak' naheen ' charvak ' hain .' charak ayurved kee 'charak sanhita' ke janak the . 'charvak' darshan shastree the .unhone kaha tha "yavat jeevet.............ghritam pibet ".

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ऊपर की टिप्पणी में राज सिन्ह जी ने ठीक कहा है कि ये पंक्तियां ऋषि चार्वाक की हैं,जो कि दर्शन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता थे...."चार्वाक दर्शन" उन्ही द्वारा रचित एक ग्रंथ है......
वैसे ये सूद साहब वाला किस्सा आपने खूब सुनाया...कमाल है! ऎसे वन्दनीय पुरूष के सानिध्य में रहकर भी आप पारस पत्थर ढूंढने में लगे हुए हैं.आपको तो इन्हे गुरू धार्य कर लेना चाहिए था..))

Praney ! said...

<@ Raj ji & Vats ji:/b> While writing this post I was bit confused by the name of Charak. To confirm I tried to find out some information on net but found only name of 'Charak'. I apologize on my mistake and thank you for correcting me.

As far as crowning Sood Sahib as my guru is concerned, a person like me cannot even qualify for the enterence test for his 'chela' :)

Thanks all of you for visiting.

yeshpal said...

According to Charvaka- "Eat, Drink, and be marry for tomorrow we may die."

yeshpal said...

Charvaka’s Doctrine
Some of the important sutras of Brhaspati which are quoted in the various philosophical writings may be gleaned as follows:
-Earth, Water, Fire and Air are the elements.
-Bodies, Senses and Objects are the results of the different combinations of elements.
-Consciousness arises from Matter like the intoxicating quality of wine arising from fermented yeast.
-The Soul is nothing but the conscious body.
-Enjoyment is the only end of human life.
-Death alone is liberation.

Lakshmanan said...

ghatiya insaan, besharmi se logon ko lootta hai aur uski bibi uske swaarth me saath deti hai. Aise namoone to dehli mein hamne bahut dekhe hein. Is me bechare brhaspati ka kya kasoor. vedic samaj mein vartaman andhavishwas ko dekh sudharne ka ek prayas that carvak darshan. Kintu ve atishay ke karaN marg bhrasht ho gaye. Na atma ko mante, na paramatma ko, na dharm ko na karma ko, bas prithivi , ap, tejas aur vayu ke svabhav ko, na vedon ko, na upanidshadon ko. Akhir insaan aur janvar mein kya pharak raha. Vedon ka bahishkar chate the, kintu vedon aur ramayan or mahabharat se shlok uthakar unka apne kutark ke liye durupayog kiya. Itna jaroor huva ki ant me bauddha, Jain or adi sankaracharya and vivad mein inko haraya aur parinam yeh hua ki advait aur sanatan dharm ka punar agamam or uddhar hua. Keval is liye caravaka darshan ko yaad kiya jata hai. Gadhon ki tarah jine wale Mr. and Mrs Sood ko is vivad mein na layen to accha hoga.